Abortion
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कई मामलों में प्रेगनेंसी के 15 हफ्ते के भीतर ही गर्भपात हो जाता है और महिलाओं को पता भी नहीं चल पाता। ऐसे में जरूरी है कि महिलाओं को गर्भपात यानी की एबॉर्शन होने के लक्षणों के बारें में बताया जाए, जिससे इस तरह का कोई भी संकेत मिलने पर वे तुरंत डॉक्टर के पास जा सके।
 गर्भावस्था के शुरूवाती दिनों में यदी आपको ब्लीडिंग हो तो इसका मतलब गर्भपात ही हो ऐसा जरूरी नहीं। आमतौर पर शुरूवाती दिनों में हल्की ब्लीडिंग होना सामान्य होता है लेकिन चिंताजनक तब हैं जब आपको स्पॉटिंग या थक्को के साथ ज्यादा ब्लीडिंग हो और ब्लीडिंग के दौरान ब्लड का रंग भूरा या गहरा लाल हो।

What is abortion? गर्भपात क्या होता है ?

जब गर्भावस्था के 20वें सप्ताह से पहले गर्भ में भ्रूण की मृत्यु हो जाए, तो उसे गर्भपात कहते हैं। इसे स्वत: गर्भपात भी कहा जाता है। बहुत से लोगों को लगता है कि गर्भपात बहुत दुर्लभ स्थिति में होता है, लेकिन ऐसा नहीं है।

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Types of abortion गर्भपात के प्रकार

गर्भपात विभिन्न प्रकार के होते है आइये जानते है गर्भपात के प्रकार के बारे है –

  1. मिस्ड गर्भपात (Missed Abortion) : इसमें गर्भावस्था खुद से खत्म हो जाती है। इस दौरान न ही कोई रक्तस्राव होता है और न ही किसी तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में तो गर्भपात होने के बाद भी भ्रूण गर्भ में ही रहता है और इसका पता तब चलता है जब गर्भ में भ्रूण का विकास रुक जाता है। इसका पता अल्ट्रासाउंड से किया जाता है।
  1. अधूरा गर्भपात (Incomplete Abortion) : इस तरह के गर्भपात में महिला को भारी रक्तस्राव और पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द होता है। इसमें भ्रूण का कुछ ही भाग बाहर आ पाता है। यही कारण है कि इसे अधूरा गर्भपात कहा जाता है। इसका निदान अल्ट्रासाउंड से किया जा सकता है।
  2. पूर्ण गर्भपात (Complete Abortion): नाम की तरह यह गर्भपात पूरी तरह से होता है। इसमें गर्भाशय से भ्रूण पूरी तरह से बाहर आ जाता है। पेट में तेज़ दर्द होना और भारी रक्तस्राव होना पूर्ण गर्भपात के लक्षण हो सकते हैं।
  1. अपरिहार्य गर्भपात (Inevitable Abortion) : इसमें रक्तस्राव होता रहता है और गर्भाशय ग्रीवा खुल जाती है, जिससे भ्रूण बाहर आ जाता है। इस दौरान महिला को पेट में लगातार ऐंठन होती रहती है।5.
  2. संक्रमित (सेप्टिक) गर्भपात : इस दौरान गर्भ में संक्रमण हो जाता है, जिससे गर्भपात होता है।

What is causes of abortion? गर्भपात के कारण क्या है?

गर्भपात के कुछ मुख्य कारणों के बारे में हम यहां बता रहे हैं  :

  • हार्मोनल असंतुलन।
  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता या ब्लड क्लॉटिंग की समस्या।
  • थायरॉयड या मधुमेह जैसी समस्याएं।
  • गर्भ या गर्भाशय में किसी तरह की समस्या।
  • बहुत ज्यादा धूम्रपान के कारण।

गर्भपात होने के अन्य कारण :

  1. क्रोमोजोम असामान्यता : यह भी गर्भपात का एक कारण हो सकता है। व्यक्ति के शरीर में मौजूद छोटी-छोटी संरचनाओं को क्रोमोजोम कहते हैं। ये संरचनाएं जीन्स को लाने और ले जाने का काम करती हैं। किसी-किसी मामले में जब पुरुष के शुक्राणु अंडों से मिलते हैं, तो अंडे या शुक्राणु में से किसी एक में त्रुटि आ जाती है, जिससे भ्रूण में एक क्रोमोजोम का मेल असामान्य हो जाता है, ऐसे में गर्भपात हो सकता है ।
  1. गर्भाशय असामान्यताएं और असमर्थ सर्विक्स : जब महिला के गर्भाशय का आकार और गर्भाशय का विभाजन (इसमें गर्भाशय का अंदरुनी भाग मांसपेशीय या फाइब्रस दीवार से विभाजित होता है) असामान्य होता है, तो गर्भपात की स्थिति बन सकती है, क्योंकि ऐसे में भ्रूण गर्भाशय में प्रत्यारोपित नहीं हो पाता।
  1. इम्यूनोलॉजी डिसऑर्डर : कभी-कभी इम्यूनोलॉजी डिसऑर्डर (इसमें अस्थमा, एलर्जी, ऑटोइनफ्लेमेटरी सिंड्रोम जैसी समस्याएं हो सकती हैं) के कारण गर्भाशय में भ्रूण का प्रत्यारोपण नहीं हो पाता, इस वजह से भी गर्भपात हो सकता है।
  1. पीसीओएस (पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) : जिन महिलाओं को पीसीओएस की समस्या रहती है, उनमें गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में प्रोजेस्ट्रोन व एस्ट्रोजन हार्मोंस का संतुलन बिगड़ जाता है, जिस कारण गर्भधारण के लिए अंडे विकसित नहीं हो पाते हैं ।

ऊपर आपने पढ़े गर्भपात होने के कारण, आइए, अब जानते हैं बार-बार गर्भपात होने के कारण।

बार-बार गर्भपात होने के कारण

जिन महिलाओं का गर्भपात बार-बार होता है, उसके पीछे क्रोमोज़ोम असामान्य होना अहम कारण हो सकता है। यहां हम कुछ अन्य कारण बता रहे हैं, जिनकी वजह से बार-बार गर्भपात हो सकता है, जैसे :

  • अधिक उम्र में गर्भधारण की कोशिश करना : जो महिलाएं 35 वर्ष से ज्यादा उम्र में गर्भधारण की कोशिश करती हैं, उन्हें बार-बार गर्भपात हो सकता है ।
  • ज्यादा भागदौड़ करना या ज्यादा यात्रा करना : गर्भावस्था के दौरान बहुत ज्यादा भागदौड़ करना या पहली और तीसरी तिमाही में यात्रा करना गर्भपात का कारण बन सकता है।
  • पेट पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना या चोट लगना : अगर गर्भावस्था के दौरान महिला के पेट पर चोट लगती है या दबाव पड़ता है, तो भी गर्भपात हो सकता है।
  • योनि में किसी तरह का संक्रमण होना : महिलाओं को योनि में संक्रमण होना आम बात है। ऐसे में बार-बार होने वाला योनि संक्रमण गर्भपात का कारण बन सकता है 

Treatment of abortion गर्भपात का इलाज व निदान

गर्भपात का सही समय पर निदान कर लिया जाए, तो संक्रमण जैसी समस्या से बचा जा सकता है। ऐसा न होने पर महिला को खतरा हो सकता है। नीचे हम बता रहे हैं कि गर्भपात का निदान कैसे किया जाता है  :

पेल्विक जांच : इस दौरान डॉक्टर ग्रीवा के फैलाव की जांच करेंगे।

अल्ट्रासाउंड : अल्ट्रासाउंड के दौरान, डॉक्टर भ्रूण के दिल की धड़कन की जांच करके पता लगाएंगे कि भ्रूण सामान्य रूप से विकसित हो रहा है या नहीं। अगर इससे कुछ पता नहीं चलता है, तो लगभग एक सप्ताह में फिर से अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है।

ब्लड टेस्ट : इस दौरान डॉक्टर आपके रक्त का नमूना लेकर ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन (एचसीजी) के स्तर की तुलना पहले के स्तर से कर सकते हैं। अगर यह बदला हुआ आए, तो यह समस्या का संकेत हो सकता है। डॉक्टर यह भी जांच सकते हैं कि कहीं आपको एनीमिया तो नहीं है।

टिश्यू टेस्ट : अगर ग्रीवा से टिश्यू बाहर निकलने लगे हैं, तो डॉक्टर गर्भपात का पता लगाने के लिए इनकी जांच सकते हैं।

क्रोमोजोम टेस्ट : अगर आपको पहले भी गर्भपात हो चुका है, तो डॉक्टर क्रोमोजोम संबंधी परेशानी का पता लगाने के लिए आपका और आपके पति का ब्लड टेस्ट कर सकते हैं।

आइए, अब जानते हैं गर्भपात के इलाज के बारे में  :

  • अगर गर्भावस्था के शुरुआत में ही गर्भपात हो जाता है, तो भ्रूण की मृत्यु के एक हफ्ते के भीतर वह अपने आप ही योनी मार्ग से बाहर निकल जाता है। इसे प्राकृतिक गर्भपात कहते हैं। अगर यह प्राकृतिक रूप से न हो, तो मेडिकल ट्रीटमेंट लेने की ज़रूरत पड़ सकती है।
  • मेडिकल ट्रीटमेंट के जरिए गर्भपात में या तो दवाइयां खाकर इलाज किया जाता है या फिर योनि मार्ग से दवा डालकर इसका उपचार किया जाता है। ज्यादातर डॉक्टर योनि मार्ग से दवा डालकर इसका उपचार करते हैं। इस प्रक्रिया में 24 घंटे का समय लग सकता है।
  • इसका उपचार सर्जरी से भी किया जाता है, जिसे डायलेशन एंड क्यूरेटेज (D&C) प्रक्रिया कहा जाता है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर गर्भाशय से भ्रूण के उत्तक बाहर निकालते हैं। यह तब किया जाता है, जब उत्तक खुद बाहर नहीं निकलते।

This Post Has 7 Comments

  1. Karuna

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  2. Karuna

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  4. Karuna mohabe

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